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22 बार चुनाव में हारकर फिर से 23वीं बार चुनाव लड़ने जा रहा है ग्वालियर का चायवाला

20/4/2019/मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक और चायवाला है, जोकि 23वीं बार चुनाव लड़ने जा रहा है। 49 वर्षीय आंनद सिंह साल 1994 से चुनाव लड़ते आ रहे हैं। आंनद ने बताया कि लोगों के अलग-अलग शौक होते हैं, मेरा चुनाव लड़ना ही मेरा शौक है। मैं लोकतंत्र के इस पर्व का हिस्सा बनना चाहता हूं। देश के एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इसे मैं अपना फर्ज मानता हूं। आनंद सिंह इससे पहले 22 बार चुनाव हार चुके हैं। यहां तक कि उनकी जमानत भी जब्त हुई है और उनको आर्थिक नुकसान भी झेलाना पड़ा है, लेकिन इन सबके बावजूद वो लगातार चुनाव लड़ते रहे हैं। आनंद सिंह ने 25 साल पहले पहली बार नगर निगम का चुनाव लड़ा था। नामांकन के वक्त दी गई जानकारी के अनुसार आनंद के पास नगद पांच हजार रुपए, पत्नी के पास मंगलसूत्र, एक साईकिल और अपना मकान है। इसके अलावा उनपर 12 हजार का बैंक का कर्ज और अलग से 60 हजार रुपये का कर्ज है। आनंद की ग्वालियर के समाधिया कॉलोनी की गेट पर चाय की दुकान चलाते हैं। आनंद सिंह कुशवाहा के परिवारवालों ने उन्हें समझाने की भरपूर कोशिश की, पर उन्होंने एक नहीं सुनी। अब उनके घर वाले आनंद सिंह के चुनाव लड़ने के फैसलें पर कुछ नहीं बोलते हैं। आनंद सिंह कहते हैं कि उम्मीद है कि मुझे बसपा से टिकट मिल जाए। फिलहाल मैंने चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र में खुद को बसपा का उम्मीदवार बताया है। अगर, बसपा से टिकट नहीं भी मिला तो मैं निर्दलीय चुनाव लड़ूंगा और उम्मीद है कि इसबार जीत मिलेगी। पीएम नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में हमेशा से कहते आए हैं कि देश के लोगों ने एक चायवाले को सिर आंखों पर बिठाया और प्रधानमंत्री बनाया। उनके नाम के साथ ‘चायवाला’ शब्द भी खूब चर्चा में बना रहता है। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक और चायवाला है, जोकि 23वीं बार चुनाव लड़ने जा रहा है।

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