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विधि विधान के साथ की गई गोवर्धन पूजा

एनसीआर -/दीपावली के अगले दिन ही गोवर्धन पूजा का पर्व भक्भिाव के साथ मनाया गया। आंगन में गोबर से गोवर्धन का प्रतीक बनाकर विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। जिसमें परिवार की खुशहाली और पशुओं की कुशलता की कामना की। गुरुवार को गोवर्धन की तैयारियों में घर की महिलाएं सवेरे से ही लग गई थी। गांव देहात में गोबर से गोवर्धन का प्रतीक घर के आंगन में बनाया गया। जिसमें गोबर से पशु, पशुओं के बच्चे, चारे की नांद आदि बनाए गए। मान्यता है कि द्वापर युग में इंद्र देवता के क्रोधित होने पर गोकुल वासियों को आंधी और बारिश का सामना करना पड़ा था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लिया था। जिसके बाद गोवर्धन पर्वत के नीचे गोकुलवासियों ने अपने पशुओं सहित शरण ली थी। गोवर्धन पर्वत के कारण आंधी बारिश और इंद्र का कोप भी गोकुल वासियों का कुछ बिगाड़ नहीं पाया था। माना जाता है कि तभी से गोवर्धन पूजा होती है। गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर उसी में पशुओं आदि का भी स्वरुप बनाया जाता है। इसके अलावा खेतीबाड़ी से संबंधित छोटे उपकरण भी गोवर्धन पूजा में रखे जाते हैं। माना जाता है कि परिवार के सभी लोग गावर्धन पूजा में शामिल होते हैं। वहीं शाम के समय सभी एकत्रित होकर गोवर्धन पूजा होने का विधान है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार को जिलेभर में गोवर्धन पूजा विधि विधान के साथ की गई। नोएडा के चौड़ा गांव में हुई पूजा में शामिल परमाल ,रविंदर ,चरण सिंह वेदराम ,रामवीर ,महिपाल, मिंटू ,बबलू ,जय वीर, संतराम, नरेंद्र,, जितेंद्र, लख्मी, मोंटी, प्रवीण, बिजेंदर ,परमिंदर ,,सुंदर, पदम, रमेश ,विनोद ,जगमेर, आदि ने सपरिवार पूजा की। इसमें परिवार की खुशहाली और कुशलता की कामना की। गोवर्धन पूजा कर आतिशबाजी की गई। वहीं दीप भी जलाए गए। —-

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