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राज्यसभा सांसद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा पत्र। गाजियाबाद का नाम बदलने की मांग उठी

5/12/2018/फैजाबाद और इलाहाबाद के नाम बदले जाने के  बाद अब गाजियाबाद का  नाम बदलने की भी मांग उठने लगी है। यह मांग बीजेपी से राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल ने उठाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर गाजियाबाद का नाम महाराजा अग्रसेन नगर रखने की मांग की है ।उनका कहना है कि गाजियाबाद की पहचान वैश्य समाज से जानी जाती है । क्योंकि गाजियाबाद में सबसे ज्यादा संख्या में वैश्य समाज ही रह रहा है । उनका कहना है कि गाजियाबाद में रहने वाले वैश्य समाज के लोगों की ही  यह मांग है ।कि गाजियाबाद का नाम भी बदलना चाहिए ।राज्यसभा सांसद ने कहा कि मुगल शासक गयासुद्दीन ने यह गाजियाबाद बसाया था। लेकिन वह एक शासक था लेकिन गाजियाबाद के विकास में वैश्य समाज का एक बहुत बड़ा योगदान रहा है। पहले गाजियाबाद एक छोटा सा कस्बा हुआ करता था ।लेकिन अब गाजियाबाद की पहचान देश में ही नहीं विदेशों में भी है ।क्योंकि गाजियाबाद में एजुकेशन और इंडस्ट्रीज तथा व्यापार की वजह से गाजियाबाद ने अपनी एक अलग  पहचान बनाई है। और जनपद में सबसे ज्यादा कारोबार वैश्य समाज द्वारा ही किया गया है जिससे सरकार को भी सबसे ज्यादा रिवेन्यू गाजियाबाद से ही जाता है।  उन्होंने  कहा कि गयासुद्दीन के नाम पर गाजियाबाद गुलामी के दिनों की याद दिलाता है।
उधर इस बारे में  गाजियाबाद के कुछ समाजसेवी और दूसरी पार्टी के नेताओं  से भी इस बारे उनकी राय ली तो    अभिषेक गर्ग  उनका कहना है  ।कि सांसद जी ने नाम तो अच्छा सोचा है लेकिन उनको गाजियाबाद के विकास और उन्नति के बारे में सोचना चाहिए। क्योंकि गाजियाबाद का नाम बदलने से पहले  यहां के विकास के लिए जाने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है  इसलिए सबसे पहले  यह का विकास किया जाना चाहिए। समाज सेविका वंदना चौधरी ने भी कहा कि नाम बदलने से कुछ नहीं होता है । यह सब एक राजनीति का हिस्सा है यदि यहां का विकास  तेज गति में होगा  तो निश्चित तौर पर  इन्हें राजनीति के चलते  शहर का नाम बदलने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी  जनता  खुद-ब-खुद इन  राजनेताओं का  गुणगान करेंगी ।गाजियाबाद के ही रहने वाले एक निवासी राकेश से हमने बात की तो उन्होंने भी यह बताया कि गाजियाबाद का नाम नहीं बदलना चाहिए इससे काफी दिक्कतें आएंगी। इन्होंने अपनी राय में यह भी कहा कि यदि किसी शहर का नाम बदला जाता है तो निश्चित तौर पर उस शहर के केवल एक नाम बदले जाने से काफी रेवेन्यू का नुकसान होता है और जो पहचान आज देशभर में गाजियाबाद की बन चुकी है उसे नाम बदलने के बाद दोबारा से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए ज्यादातर लोगों की रायशुमारी में यही सामने आया की बहराल गाजियाबाद का नाम बदलने के बजाय सभी राजनेता यहां के विकास के बारे में सोचे तो ज्यादा बेहतर है।

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