7/5/016/पत्रकार धीरेन्द्र अवाना /नोएडा।प्रदेश सरकार मजदुरों को लुभाने के लिए तरह तरह की योजनाए बनाते है मजदुर दिवस को मजदुरों को साइकल बाटते है पर गरीब मजदूर आज भी इन सबसे वंचित है।गरीब मजदुर आज भी घुट-घुट कर मर रहा है कही उसका शोषण बिल्ड़रों द्वारा किया जाता है तो कही उसे बंधुवा मजदूर तक बनाया जाता है। ऐसा ही नजारा नोएडा व ग्रेटर नोएडा में देखने को मिलता है। हम बात कर रहे है ग्रेटर नोएडा एक्सेटेंशन में बिल्डरों की। आये दिन साइटों पर मजदुरों की मौत हो जाती है ऊँची पहुच की वजह से कोई ऐसा कानून नहीं जो इन पर फंदा डाल सके और मौत को हादसा बना कर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है। अपनी दबंगई के चलते बिल्ड़र साइट पर मजदूरों से जबरन काम लेते है। वही मजदुर की मौत पर अगर सेटलमेंट की बात आए तो डरा धमका कर मजदुर के परिजनों को समझोते के लिए बाध्य कर देते है। लेकिन इनकी कहानी यही नहीं रूकती, अगर साइट पर मजदूर की मौत हो जाए तो इसके बाद भी बिल्डर कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में ये बिल्डर जहा एक तरफ लेबर एक्ट के नियमों की धाज्जियां उड़ा रहे है वही दूसरी ओर सेफ्टी उपकरण न देने पर पल्ला झाड़ लेते है। इसके साथ ही जिला प्रशासन और कानून की आंख में धूल झौकने के लिए साइट पर जगह-जगह सुरक्षा नियमों के बोर्ड चस्पा करवा देते है।मामला ये है कि ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन के गांव हैबतपुर के पास महागुन की माईवुड की साइट पर काम चल रहा है।वहा साइट पर काम कर रहे मजदूरों के लिए सेफ्टी उपकरण भी नहीं है। मजदुर अपनी जान जोखम में डाल कर काम कर रहे है। बीते मंगलवार शाम को करीब चार बजे निर्माणधीन साईट पर 25 वी मजिंल से सेटरिंग का काम करते हुए बिहार निवासी राजेश कुमार झा उम्र 25 वर्ष की गिर कर मौत हो गई थी।मजदूरों का आरोप है कि मृतक कंपनी की गलती से गिरा है। अगर सेफ्टी उपकरण होते तो उसकी जान बच सकती थी। वही जब टीम ने शुक्रवार को महागुन की माईवुड साइट का जायजा लिया तो हमने देखा कि बिल्ड़र लेवर एक्ट के नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे है।बिल्डर ने पूरी साइट पर सुरक्षा के नियमों का बखान करने वाले बोर्ड तो लगा रखे है पर लगता है कभी उन्हे पढ़ा नही।इसी लिए किसी भी मजदूर पर सुरक्षा उपकरण नहीं था। इसके साथ ही जिस 25वी मंजिल से मजदूर की गिर कर मौत हो गई थी। तीन दिन बाद भी उस टावर से सुरक्षा का उपकरण जाल नदारद मिला।फिर भी मजदूर अपने व अपने परिवार वालों के लिए जान जोखम में डाल कर बिना सुरक्षा उपकरण के काम कर रहे है।मजदूरो का यह भी आरोप है कि कांन्ट्रेक्टर ने 12 घंटे काम करने का आदेश दे रखा है।जब कि लेबर एक्ट के नियमों के तहत मजदूर आठ घंटे ही काम करता है। क्या साइट पर काम करने वाले मजदूरो का यूही शोषण होता रहेगा।मजदूरों के शोषण बात करके अपनी राजनैतिक रोटी सैकने वाले संगठन कहा है। श्रम विभाग ने अपनी आखे क्यो मूद रखी है।वही जब हमने महागुन बिल्डर की साइट पर फेस-1 के कांट्रेक्टर जेपी शर्मा से बात की तो उन्होने बताया कि कई बार उच्च अधिकारियों को बोला गया है कि साइट पर काम कर रहे मजदूरों को सुरक्षा उपकरण की जरूरत है। लेकिन अधिकारी इस बात को अनदेखा करते है। आप को बता दे कि साइट पर काम कर रहे मजदूरो की सुरक्षा के लिए सुरक्षा हेल्मेट, दस्ताने, सुरक्षा पेटी , जूते, चश्मा व मास्क दिये जाते है। ऐसे में मजदूर धूल में काम करने के बाद भी बिमार नहीं होता।ये सब उपकरण कंपनी को देना अनिवार्य है।जब से कंपनी में मौत हुयी है तबसे मजदूरों में डर बैठ हुआ है।जिसकी वजह से बहुत से मजदूर काम पर नही आ रहे है। माईवुड साइट पर काम कर रहे कांटेरक्टर जेपी शर्मा ने बताया कि इस साइट पर करीब दस कांटेरक्टर काम कर रहे है, जो लगभग 10 से 15 लेबर उपलब्ध कराते है। वही देखा जाए तो शुक्रवार को करीब पचास मजदूर ही काम कर रहे थे।सूत्रों के अनुसार कुछ मजदूर अपने घर चले गए है वही कुछ दूसरी साइट पर काम ढूढने को मजबूर है।इस संम्बध में जब उपश्रम आयुक्त बीके राय से बात की तो उन्होने बताया कि अगर मजदूर की साइट पर मौत होती है तो बिल्ड़र को श्रम विभाग को सूचना देना आनिवार्य है।ऐसा ना करने पर बिल्ड़र के खिलाफ कारवाई होगी। लेबर विभाग की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी। इसके साथ ही अगर मजदूर 12 घंटे काम कर रहे है तो सख्त कार्रवाई होगी और मजदूरों को ओवर टाइम भी बिल्डर को देना होगा। उन्होने बताया कि किसी भी मजदूर के साथ अन्याय नहीं होगा। वही बिल्ड़र जिलाधिकारी एनपी सिंह ने आदेशों की भी अवहेलना कर रहे है उनका आदेश है कि गर्मीयों में साइट पर मजदूरों को दोपहर के समय छुट्टी देनी होगी।
