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भगत सिंह और उनके साथियों के शहीद होने से लाखों लोग दुखी

22/3/2019/2005 में श्याम बिहारी लाल की मौत के बाद आईटीआई रोड स्थित इंडस्ट्रियल एस्टेट में रहने वाले इनके बेटे निरंजन लाल ने इन्हें बहुत ही हिफाजत से सहेजा। सन् 1931 के इन अखबारों की सुर्खियों से पता चलता है कि जमाने ने भगत सिंह की फांसी की खबर को किस अंदाज में जाना होगा। उस समय की खबरों से पता चलता है कि अंग्रेजी हुकूमत भगत सिंह की फांसी की खबर को दबाना चाहती थी। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दी गई थी। उनकी फांसी पर महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘भगत सिंह और उनके साथियों के शहीद होने से लाखों लोग दुखी हैं। देश की स्वतंत्रता हिंसा और हत्या से प्राप्त न होगी’उनकी फांसी पर महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘भगत सिंह और उनके साथियों के शहीद होने से लाखों लोग दुखी हैं। मैं उनकी लगन की भूरि-भूरी प्रशंसा करता हूं। मैं देश के नवयुवकों को इस बात की चेतावनी देता हूं कि वे उनके पथ का अवलंबन न करें। हमें भरसक उनके अभूतपूर्व त्याग, अदम्य उत्साह और विकट साहस का अनुकरण करना चाहिए, परंतु उन गुणों का उपयोग उनकी तरह न करना चाहिए। देश की स्वतंत्रता हिंसा और हत्या से प्राप्त न होगी’

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