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नामवर सिंह जी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र का राज है उनका पढ़ना और लिखना।

20/02/2019/दिल्ली/नामवर सिंह ने हिंदी साहित्य में आलोचना और साक्षात्कार विधा को नई पहचान ही नहीं बल्कि नई ऊंचाई भी दी। साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त नामवर का जन्म चंदौली जिले के जीयनपुर में हुआ था। काशी विश्वविद्यालय से साहित्य में एमए और पीएचडी करने के बाद वहीं कई साल तक प्रोफेसर रहे।नामवर सिंह ने सागर विश्वविद्यालय में भी अध्यापन कार्य किया, लेकिन सबसे लंबे समय तक वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रहे। यहां से रिटायर होने के बाद वह एमिरिटेस प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाते रहे। आलोचना में उनकी किताबें पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद आदि मशहूर हैं। लोकप्रियता पर बने रहना पसंद है। यह केवल अध्यापन करते हुए संभव नहीं था। आलोचकों में भी ऐसी लोकप्रियता किसी को नहीं मिली, जैसी नामवरजी को मिली है। पिछले साल 28 जुलाई को जब नामवर सिंह 92 साल के हो गए तो लेखक और उनके छोटे भाई काशीनाथ सिंह ने कहा था कि नामवरजी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र का पहला राज है उनका पढ़ना और लिखना। जब तक वह पढ़ सकते हैं, तब तक वे स्वस्थ रहेंगे। काशीनाथ ने कहा, उनके स्वास्थ्य का दूसरा बड़ा राज है, विरोध सुनते रहना। विरोध से वह ताकत पाते हैं।

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