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गढ़वा: शौचालय के आभाव में रुकी बेटों की शादी

30/03/18/गढ़वा: हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहीम जहां सोच वहां शौचालय हर जगह अपना रंग दिखा रही है लड़कियों द्वारा जहां शौचालय नहीं है, उस वजह से ससुराल छोड़ने या वहां जाने से इनकार की खबरें तो अक्सर आती रहती हैं , लेकिन ऐसा शायद पहली बार हैं कि महिलाओं ने घर में शौचालय नहीं होने के कारण बहू लाने से मना कर दिया हो जी हा  यह मिसाल कायम की है गढ़वा के हरिहरपुर के मझिगावां की महिलाओं ने उन्होंने कहा है कि घर में जब तक शौचालय नहीं बनेगा, वे अपने बेटों की शादी नहीं करेंगी अगर महिलाओं के इस फैसले को सामाजिक तोर पर ऐतिहासिक बताया जाए तो इसमें कोई अचरज की बात नहीं होगी ..

करीब आठ हजार की आबादी वाले इस गांव की चार महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से यह फैसला सुना दिया है। इन महिलाओं में सोना, देवी, बसमतिया और सुगवंती शामिल हैं। सोना के घर में शौचालय नहीं है। उन्होंने परिवार के पुरुष सदस्यों को कई बार इस बारे में बताया। जब किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, तो उन्होंने बेटे अक्षय की शादी ही रोक दी। कहा कि शौचालय विहीन घर में वह बहू नहीं लाएंगी, क्योंकि इससे पूरे घर की इज्जत खराब होगी। सोना के इस फैसले को घरवाले भी मान गए। जब सोना के फैसले की जानकारी पड़ोसी महिलाओं को मिली, तो उन्होंने भी अपने बेटों की शादी टाल दी। चारों की शादी अप्रैल में तय थी।

जागरूक हो रही हैं महिलाएं : गांव की महिलाएं स्वच्छता के प्रति जागरूक हो रही हैं। यहां अधिकांश आबादी गरीब और अशिक्षित है, लेकिन महिलाओं में जागरुकता के कारण पुरुषों ने भी घरों में शौचालय बनवाने की कोशिश शुरू कर दी है।

झारखंड में शौचालय की स्थिति

झारखंड को अक्तूबर 2018 तक ओडीएफ करने का लक्ष्य है। इसके तहत 2.10 लाख घरों में शौचालय बनाया जाएगा। पांच हजार सीटों के सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण भी किया जाना है। 31 दिसंबर, 2017 तक राज्य में 98 हजार घरों में शौचालय बनवाए जा चुके थे।

गांव में शौचालय के लिए अभियान शुरू

गांव में शौचालय निर्माण का अभियान भी शुरू हुआ है। वीणा महिला स्वयं सहायता समूह और जीवन ज्योति महिला स्वयं सहायता समूह गांव में शौचालय बनवा रही हैं। गांव की महिलाओं में जागरुकता का आलम यह है कि सवलडीह टोले में बनाए जा रहे शौचालय की गुणवत्ता में पहले कुछ कमी थी, जिसे महिलाओं ने ही पकड़ा और इसमें सुधार कराया। अभी भी समय हैं.. समय पे जागरूक हो जाए क्योंकि अगर जैसा इन महिलाओं ने सोचा है वैसा अगर हर नागरिक सोच के अमल करने लगा तो वो दिन दूर नहीं है जब सब को ये गाना गुनगुनाना पड़े ‘ मेरी शादी करवायो ..मेरी शादी करवायो’.

 

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